
पटना साहिब से सांसद और बीजेपी के वरिष्ठ नेता रवि शंकर प्रसाद ने रविवार को पटना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में विपक्ष के “वोट चोरी” के आरोपों को पूरी तरह से “झूठा और बेबुनियाद” करार दिया।
चुनाव आयोग पर सवाल? तब ठीक था जब जीत मिली!
रवि शंकर प्रसाद ने विपक्ष की “सुविधा के अनुसार नाराज़गी” पर तंज कसते हुए कहा:
“जब यूपी में 2024 लोकसभा चुनाव में सपा को 37 और कांग्रेस को 6 सीटें मिलीं, तो चुनाव आयोग ठीक था।
लेकिन अब जब जनता ने साथ नहीं दिया, तो आयोग पर ही सवाल उठा रहे हैं!”
ये बयान सीधे तौर पर राहुल गांधी और तेजस्वी यादव के उस आरोप का जवाब था, जिसमें उन्होंने कहा था कि “बिहार में वोटर लिस्ट से लाखों नाम काटे गए हैं” और चुनाव आयोग बीजेपी के साथ पार्टनरशिप में काम कर रहा है।
राजनीतिक लॉजिक बनाम पब्लिक लॉजिक
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जब परिणाम आपके हक़ में आएं → आयोग महान
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जब परिणाम खिलाफ जाएं → आयोग मिला हुआ?
रवि शंकर प्रसाद ने कहा,
“ये लोकतंत्र का नहीं, विपक्ष की राजनीतिक हताशा का प्रमाण है।”
“राजनीति का नया सूत्र— अगर हारो तो ‘वोट चोरी’, अगर जीतो तो ‘जनता की जीत’!”
विपक्ष कहे – “हमें आयोग से शिकायत है”
बीजेपी बोले – “आयोग वही है, जो आपको 37 सीटें भी दिला चुका है!”
बीजेपी का रुख: जनादेश का सम्मान करें, सिस्टम पर बेवजह हमला न करें
रवि शंकर प्रसाद का तर्क था कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है, और उसके ऊपर बिना सबूत आरोप लगाना देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाना है।
“चुनाव आयोग पर भरोसा तब तक ही है, जब तक परिणाम अपने पक्ष में हो? ये दोहरी सोच नहीं चलेगी।”
विपक्ष की “आशंका” बनाम सत्ता पक्ष का “तंज”
बीजेपी का साफ संदेश है — जनता की अदालत में हार को स्वीकार कीजिए, लोकतंत्र को दोष मत दीजिए।
अब देखना यह है कि विपक्ष इन बयानों का क्या जवाब देता है और क्या यह बहस राजनीतिक विमर्श को और गर्माएगी?
राहुल गांधी बोले: “हमारी पार्टनरशिप मजबूत है, कोई टेंशन नहीं”

